![]() |
| इस मुई ब्लॉगिंग ने निकम्मा कर दिया |
सुप्रभात,
फिर वही गुनगुनी, धूप सी मुस्कुराती, खिलखिलाती हलचल लेकर मै सुनीता शानू एक बार फिर आप सभी का स्वागत करती हूँ। दोस्तों मुझे ब्लॉगिंग करते हुए पूरे छः साल हो गये। 08 अप्रैल 2007 में जब मैने समीर भाई यानि की हमारे जाने-माने ब्लॉग उड़नतश्तरी से ब्लॉग से सम्बंधित जानकारियाँ ली थी गीत कलश के राकेश भाई ने मेरी रचनाओं पर टिप्पणियाँ देकर मेरा साहस बढ़ाया था। सही अर्थों में ब्लॉग कैसे बनाया जाता है सीखा था आवारा बंजारा यानि की सबके चहेते संजीत त्रिपाठी जी से। ब्लॉग की सुंदरता बढ़ाने का श्रेय आरम्भ वाले संजीव तिवारी जी को जाता है। जिन्होने सदा निःस्वार्थ भाव से सभी के ब्लॉग पर एचटीएमएल तथा हेडर कैसे लगाया जाता है सिखाया।
अरविंद जी ने सच ही कहा है मालूम नही कब ब्लॉगिंग एक नशा बन गई थी। और आज लगता है यह नशा उतरता जा रहा है। कारण शायद समय की कमी अथवा व्यस्तता। किन्तु पहले भी समय सीमित था व्यस्तता बहुत थी उस समय बच्चे भी छोटे थे। शब्दों के दंगल में फँसे तो शास्त्री जी इसे आदत कहते हैं। किंतु आज ब्लॉगिंग से ऊब क्यों महसूस होने लगी है। क्या ब्लॉगिंग को अभी भी प्रोत्साहन की आवश्यकता है? कहीं ऎसा तो नही कि मेरी तरह अन्य कई ब्लॉगर भी महसूस करते हों कि ब्लॉगिंग ने जहां एक और हमें नित नये लोंगों से मिलवाया है उतना ही समय बर्बाद हुआ है। अफ़लातून जी की सुने तो यह कहना गलत भी नही लगता कि फ़ेसबुकिया ब्लॉगिंग के कारण ब्लॉगिंग में गिरावट आई है।
श्री बालेंदु दाधीच जी ने कहा था ब्लॉगिंग ऑनलाइन विश्व की आज़ाद अभिव्यक्ति है। किन्तु आज ब्लॉगिंग बनाम फ़ेसबुक अहम हो गई है। दिव्या जी का कहना है कि आज फ़ेसबुक और ब्लॉगिंग की बात करें तो वही बात होगी कि बेटे और बेटी मे से कौन अच्छा है?
किंतु आदरणीय टी एस दराल साहब की बात मानी जाये तो वे कहते हैं की फ़ेसबुक फास्ट फ़ूड जोइंट की तरह है जहाँ तुरंत खाना परोसा जाता है लेकिन सेहत के लिए सही नहीं होता .
खुशदीप भाई लिखते हैं ब्रेक ले लेकर ब्लॉगिंग हो रही है
ब्लॉगिंग मे तकनीकि ज्ञान भी कुछ चिट्ठों द्वारा दिया जाता रहा है जिनमे से इ-पंडित जी का चिट्ठा प्रमुख रहा है।
आज ब्लॉग के माध्यम से हर कोई अपनी जायाज, नाजायज हर माँग रख रहा है। हर तरह का लेखन प्रस्तुत कर रहा है। जिसे जो आता है परोस रहा है, कोई पढ़े या न पढ़े...जैसे की मेरी हलचल...यशवन्त माथुर जी ने कहा कि शानू जी आजकल आपकी हलचल पर कमैंट नही आते J तो क्या कहें क्या ऎसा ही होता है जब मै सभी को कमैंट दे पाती थी सब मेरी अच्छी बुरी रचना पर कमईंटियाने चले आते थे...आज मेरे पास समय कम है तो वही लोग आते हैं जो सचमुच मुझे पढ़ना चाहते हैं या पसंद करते हैं।...शायद यह बात सार्थक होती है...तू मेरी पीठ खुजला मै तेरी...क्या यही ब्लॉगिंग रह गई? J
ब्लॉगिंग करने का कुछ लोगों का अंदाज निराला है और हमेशा ही आकर्षक रहा है जैसे की अजय कुमार झा लिखते हैं हो रहा भारत निर्माण.. J
बहुत से नायाब ब्लॉग हमारे बीच हैं जिन्होनें तमाम उम्र लेखन किया है जिनमे से कुछ हैं... प्रमोद जोशी जी, गोंविंद सिंह जी, प्रमोद ताम्बट जी, अरविंद मिश्रा जी, इत्यादि और भी बहुत हैं कभी किसी दिन जिक्र करूँगी।...जो आज भी अपनी लेखनी से पहचाने जाते हैं।
दोस्तों बहुत समय हो गया अब जरा चाय नाश्ता हो जाये और इसके साथ-साथ बाकी के लिंक्स पढ़े जायें।
हमारी वाणी आज साथ नही दे रहा। रात नेट साथ नही दे रहा था। सुबह की चाय और मै बस करते हैं जिक्र कुछ चुनिंदा पोस्ट जो मैने अभी पढ़ी है।
राजेंद्र तेला जी का चिंतन...जीवन एक विशाल कैनवास
ब्लॉग बुलेटिन पर वह सब मिल जायेगा जो मै नही लिख पाई हूँ
सादर ब्लॉगस्ते पर एक कथा संगीता तोमर जी द्वारा
अलबेला भाई आज बहुत भावुक हो गये हैं....देखिये जरा
वन्दना जी भी कुछ न कुछ नया ही उठा लाती हैं उन्हे भी पढ़िये बच्चों का भविष्य भी एक चिंता का विषय है...
ये जो प्रवीण पाण्डेय है न मेरे गौत्री भाई है ( विवाह पूर्व मै भी सुनीता पाण्डेय थी J ) तो थोड़ी इनकी सिफ़ारिश वैसे इन्हे सिफ़ारिश की जरूरत ही नही
मनोज जी का लेखन जिसमें उनकी भावनायें उनके विचार आप पढ़ सकते हैं...
अब देखिये महफ़ूज़ भाई क्या लिख रहे हैं ... लेखनी पर...
ई तो बड़ा ही तेज़ चैनल है भाई...पढ़ियो रे...
अरूण कुमार निगम जी लिखते हैं बुध्द पूर्णिमा पर गीत...
चलिये अब विदा लेते हैं आप सभी से बहुत देर हुई कुछ चाय नाश्ता हो जाये वरना फिर वही पुराना राग अलापते नजर आयेंगे घर वाले इ मुई ब्लॉगिंग ने निकम्मा कर दिया...वरना शानू भी थी तो काम की J
फिर मिलेंगे आज ही के दिन अगले रविवार अगर ज़िंदगी रही...
एक बार फिर आप सभी का दिन मगंलमय हो इसी आशा और विश्वास के साथ विदा चाहती हूँ।
नमस्कार
सुनीता शानू

आपके आते तो वैसे ही हलचल पर हलचल मच जाती है। आज तो बहुत हलचल है…… हा हा हा हा। सूचनार्थ: ब्लॉग4वार्ता के पाठकों के लिए खुशखबरी है कि वार्ता का प्रकाशन नित्य प्रिंट मीडिया में भी किया जा रहा है, जिससे चिट्ठाकारों को अधिक पाठक उपलब्ध हो सकें।
ReplyDeleteमुझे मालूम है ललित भाई यह सब आपकी मेहनत और लगन का ही फल है। हौसला अफ़जाई के लिये शुक्रिया।
Deleteवार्ता के प्रिंट मीडिया मे प्रकाशन की सूचना सभी के लिये उत्साह जनक है।
Deleteआपको बहुत बहुत बधाई ललित सर!
सादर
बड़े ही रोचक ढंग से अपनी ब्लॉगयात्रा का वर्णन किया है आपने..
ReplyDeleteधन्यवाद प्रवीण जी गौत्री भाई बताया आपको बुरा तो नही लगा न? लगा तो भी क्या कर सकते हैं :)
Deleteसुनीता जी ....आप और आपकी हलचल ....एकदम अलग अंदाज़ ....खिल जाती है सुबह पढ़कर ....प्रश्न भी सार्थक पूछा है |ब्लोगिंग ज़रूर की जाये .....जिसको पसंद आएगा वो तो पढ़ेगा ही ......और अगर दमदार लेखनी है तो ब्लोगिंग की सार्थकता भी बढाएगी ही ....!!
ReplyDeleteबढ़िया हलचल ...चलती रहे .....
अनुपमा जी आप सही कह रही हैं। दमदार लेखनी आज भी कायम है अपनी जगह शुक्रिया समझने के लिये।
Deleteसुनी दी.......
ReplyDeleteशुभ प्रभात
लोगों का उतरता नशा....
अब मुझ पर हावी हो रहा है,
शब्द शैली पर परिवर्तन नजर आरहा है
ये सब आप गुरुजनों का ही प्रताप है,
आज की पोस्ट से हट कर कमेंट हेतु क्षमा
सादर
शुक्रिया यशोदा, सबसे पहले सुनी दी कहने के लिये। किसी को भाई कहना या बहन कहना मात्र कहना नही होता। मगर अफ़सोस कुछ लोग किसी भी बात को समझ नही पाते। क्या किया जा सकता है इश्वर की कृपा सभी पर तो नही न होती है।
Deleteवाह जी बढ़िया
ReplyDeleteशुक्रिया काजल जी।
Deleteनई पुरानी हलचल को पढ़ने के बाद मन मे हलचल बढ़ गई है कि कितनी जल्दी इसमें शामिल लिंक्स तक पहुंचा जाए।
ReplyDeleteसुनीता जी हलचल को तैयार करने में आपने कितनी मेहनत और मशक्कत की है इसे आसानी से समझा जा सकता है, पर आपसे एक शिकायत है... अगर जिंदगी रही तो अगले रविवार को फिर मिलेगे, मुझे लगता है कि सुबह सुबह हम सब को ईश्वर से एक दूसरे कि लंबी उम्र और खुशहाली की प्रार्थना करनी चाहिए। आप सिर्फ अगले रविवार क्या दो तीन सदी तक पड़ने वाले हर रविवार को इसी तरह हलचल सजाती रहें और हम सभी ब्लागर इस हलचल का आनंद लें। मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है।
जी महेंद्र जी मै सभी की लम्बी उम्र की कामना करती हूँ। मगर खुद के लिये कह नही सकती इसीलिये वादा नही करती कि अगले राविवार आना होगा या नही।
Deleteसमझने के लिये धन्यवाद
शुभ प्रभात .... !!
ReplyDeleteफिर मिलेंगे(जरुर मिलेगें ,अवश्य मिलेगें ,मिलते ही रहेगें) , आज ही के दिन अगले रविवार अगर ज़िंदगी(अच्छी नहीं लगी ,मरें आपके ....) रही...
आ सखी चुगली करें .... :D
जी विभा जी। धन्यवाद।
Deleteबेहतरीन हलचल के लिए हलचल भरी शुभकामनाये.....Live Tv Channel का खजाना आपके पीसी के लिए
ReplyDeleteधन्यवाद मयंक जी।
Deleteरोचक!! ब्लॉग वातावरण की ही हलचल!!
ReplyDeleteशुक्रिया सुज्ञ जी।
Deletejeevan to vishaalkaay canvass hai hee ,par bharat mein binaa chaay ke adhooraa hai ,mujhe aivam mere rachnaa ko sthaan dene ke liye dhanywaad
ReplyDeleteधन्यवाद डॉक्टर साहब।
Deleteजैसे की मेरी हलचल...यशवन्त माथुर जी ने कहा कि शानू जी आजकल आपकी हलचल पर कमैंट नही आते J तो क्या कहें क्या ऎसा ही होता है जब मै सभी को कमैंट दे पाती थी सब मेरी अच्छी बुरी रचना पर कमईंटियाने चले आते थे..
ReplyDeleteभले ही हलचल पर कमेन्ट न आते हों पर सबसे ज्यादा हिट्स सुनीता शानू के द्वारा प्रस्तुत हलचल पर होते हैं :):)
सार्थक मुद्दा उठाती हुई एक शानदार हलचल ॥लिंक्स भी आज तो फुर्सत से बटोरे हैं तो भई हम भी ज़रा फुर्सत से ही जाते हैं अब वहाँ ...
और हाँ मुझे लगता है कि शायद इतनी व्यस्त हो कि मरने की फुरसत भी नहीं मिलेगी तुमको तो मिल ही लेंगे अगले रविवार को :):)
ऐसा कुछ लिखोगी तो मेरा क्या होगा ? मेरे तो पाँव भी कब्र तक पहुँच गए हैं :):)
प्रणाम आपकी हर बात का जवाब फ़ुर्सत से दूँगी :)
Delete"फिर मिलेंगे आज ही के दिन अगले रविवार अगर ज़िंदगी रही..."
ReplyDeleteमेरा छोटा सा सुझाव >>>>जिंदगी को अपना गुलाम बना लीजिये .
आज की हलचल की सार्थकता इसका विषय सिद्ध कर देता है ।
@संगीता आंटी>>>>"मेरे तो पाँव भी कब्र तक पहुँच गए हैं :"
ऐसी बातों से इस बच्चे को न डराइए.... प्लीज़ आंटी!
सादर
सुनीता दी , आज आप ने हकीकत बयान कर दी है अब मामला ऐसा ही होता जा रहा है अगर आप कमेन्ट करेंगे तो कमेन्ट मिलेगा ... क्या किया जाये पर अब चलन यह ही बनता जा रहा है ... अब देखिये न आपने बुलेटिन का जिक्र किया आज की पोस्ट मे तो मैं भी आ गया ... है कि नहीं ... ;-)
ReplyDeleteबेहद उम्दा लिंक्स लगाए है आपने ... आभार !
सुन्दर प्रस्तुति ।
ReplyDeleteरोचक व सुन्दर हलचल
ReplyDeletebahut hi rochak links --------aabhar
ReplyDeleteब्लॉग्गिंग के लिए पर्याप्त समय हो तो फिर इससे अच्छा पढने लिखने के लिए शायद कोई अच्छा प्लेटफॉर्म नहीं..
ReplyDeleteबहुत बढ़िया सार्थक हलचल..
आभार
बाप रे इतनी हलचल..पूरा ब्लॉग हिल गया :).
ReplyDeleteजाते हैं एक एक करके.