Thursday, May 10, 2012

आज की हलचल में ...इस नगर में और कोई परेशान नहीं है ....

Coffee cupसुप्रभात , कॉफी  की चुस्कियों  के संग  शुरू कीजिये आज की हलचल पर प्रस्तुत लिंक्स को पढ़ना और आनंद  उठाइए नयी पुरानी रचनाओं का -----




प्रवीण पाण्डेय जी मन की इच्छाओं का वर्णन  कर रहे हैं ----हैं अशेष इच्छाएं मन में



जब भी पीड़ाओं से भागा, राहों में कुछ और खड़ीं, 

छोटी को झाँसा दे निकला, भाग्य लिखी थी और बड़ी, 
आगत का भय, विगत वेदना, व्यर्थ अवधि क्यों खीचें हम, 
दृश्य बदे जो, सब दिखने हैं, आँख रहे क्यों मींचे हम, 
जैसा भी है, अपना ही है, उस अनुभव से क्यों च्युत हों, 
जब आयेगीं, सह डालेंगे, दुगने मन से प्रस्तुत हों,
मेरा फोटो समीर लाल जी का कहना है ---प्रभु से बड़ा प्रभु का नाम .... चुनाव संग्राम
प्रभु से बडा प्रभु का नाम: चुनाव संग्राम- दोहे-कुण्डलियों के साथ
"प्रभु से बडा प्रभु का नाम
जपते रहो परिवार का नाम
कृपा अगर तुम पर हो जाये
पाओगे एक टिकट ईनाम."
My Photo एम॰  वर्मा जी का कहना है कि - इस नगर में और कोई परेशान नहीं है
खाना नहीं, बिजली और पानी नहीं है
इस नगर में और कोई परेशानी नहीं है
चूहों ने कुतर डाले हैं कान आदमी के
शायद इस शहर में चूहेदानी नहीं है


My Photoमनोज कुमार जी  की एक लघु कथा पढ़िये ---हर हाल में 
उस दिन दफ़्तर में पेपर कटिंग की एक छाया प्रति ख़ूब वितरित हो रही थी। किन्हीं विश्‍वस्त सूत्रों का हवाला देकर यह बताया गया था कि सरकार सेवानिवृत्ति की सीमा 60 वर्ष की जगह 62 वर्ष करने पर विचार कर रही है।
My Photo  अनुराग  शर्मा जी लगता है नज़दीकियों से घबराते हैं और कुछ इस तरह अपने ख़यालों को बयां करते हैं ---इतना भी पास मत आओ 


मार तेरे प्यार की हमने प्रिये हँसकर सही है।
शब्द मिटते जा रहे पर अर्थ तो फिर भी वही है॥
सर झुका लेते हैं जब भी देखते हैं हम तुम्हें।

रास्ते में छेड़ना तुम ही कहो कितना सही है॥

वाणी  शर्मा जी कल्पना में सोच रही हैं कि राधा और श्याम ने चन्दा से यही तो कहा होगा ---तू  बतला दे मेरे चंदा


लाता है सन्देश पिया का ,
उस तक भी पहुंचाता होगा
तू बतला दे मेरे चंदा ,
पी तुझसे तो बतियाता होगा .
..

My Photo सतीश सक्सेना जी के गीत मन मोह लेते हैं .... बचपन की ख़्वाहिशों को नाम दिया है ---मृगतृष्णा




  मंजु मिश्रा  अपनी क्षणिकाओं में गहन भाव भर, कह रही हैं कि ---अंधेरे छंटे ही नहीं--
जलते रहे
मोमबत्ती से
उम्र भर
लेकिन अँधेरे थे
कि छंटे ही नहीं….

My Photo  हरीश भट्ट  जी  की  एक संवेदनशील कहानी ----अंतस तक प्यासी है धरती
"अनिरुद्ध ""....बहुत दिन से तुमने कुछ नया नहीं लिखा...... पूछा था कादम्बनी ने...एक सकून भरी मुस्कराहट के साथ कहा था अनिरुद्ध ने...नहीं कादम्बनी कुछ नया लिखने का मन नहीं ...मेरे अन्दर से तब कुछ उत्सर्जित होता   हैं  ..जब में अकेला  होता हूँ ...दर्द और बेचैनी निकल ही आती हैं वर्कों पर ...लेकिन ...तुमसे मिलने के बाद सब कुछ पा लिया लगता हैं मेरी तलाश ख़त्म हुई...
मेरा फोटो  ओंकार जी की रचना जो प्रेरणा दे रही है पहला कदम उठाने की ---पगडंडी
कौन  चला होगा यहाँ पहली बार,
जो भी चला होगा क्यों चला होगा,
किसी से मिलने चला होगा
या किसी से बिछड़कर ?
मेरा फोटो सुनील कुमार जी लाये हैं संवेदनहीनता  का नज़ारा ---आखिर  ऐसा क्यों हुआ ?
उसका नाम था अनुपमा , देखने में आकर्षक व्यक्तिव और उम्र लगभग चालीस साल परिवार के नाम पर दो बच्चे और पति ।वह एक निजी कंपनी में स्टेनो के पद पर कार्य करती थी ।उसके पति एक कंपनी में इंजिनियर थे ।अच्छा वेतन, कोठी, कार,
My Photo मुक्ता दत्त  कर रही हैं --एक गैर ज़रूरी बात




न जाने क्या कुछ कहता रहता है
ये आईना चुप क्यों नहीं रहता है???
My Photo  मानव मेहता  दर्द के दर्द को बयां  कर रहे हैं --दर्द अब पत्थर  हो चला है


वक्त को हथेली पर रख कर
ऊँगलियों पर लम्हें गिने हैं...
दर्द देता है हौले से दस्तक-
इन लम्हों के कई पोरों में बसा हुआ है वो....
मेरा फोटो   सुमन जी एक कहानी के माध्यम से  ज़िंदगी को समझने की बात कर रही हैं .... ज़रा पढ़िये ये चुटीली  कहानी ---कवि  और कौवा 
जिस कवि की मै बात करने जा रहीं हूँ, यह कवि पुराने ज़माने का लगता है ! नहीं तो हमारी तरह आज एक बढ़िया ब्लॉगर होता ! अपनी रचनाओं को ब्लॉग पर रोज छापता और खुश होता ! कमसे कम इस तरह frustrate तो नहीं होता ! खैर कहानी ही पढ़ लीजिये ! आप खुद समझ जायेंगे !
मेरा फोटो राजेश कुमारी जी खरी खरी बात कर रही हैं अपनी ---कुछ खरी खरी त्रिवेणियों  में 
मेरे अपने ही फूलों ने
झुका दिया इस डाली को
वर्ना मेरी गर्दन ने कभी झुकना नहीं सीखा |

My Photoमृदुला  हर्षवर्धन  परेशान  हैं  और अपने जज़्बात कुछ यूं बयां कर रही हैं ---तेरा  इश्क़ ....आफत है 
तेरा इश्क है या आफत है
उफ़....ज़माने भर से अदावत है
तेरी आँखों से जो पी वो खालिस थी
मयखाना-ए-ज़माने में तो बस मिलावट है

मेरा फोटो मुकेश पाण्डे  ज्वलंत समस्या पर अपनी लेखनी चला रहे हैं ----अजन्मी  की पुकार 
सुना है माँ तुम मुझे , जीने के पहले ही मार रही हो
कसूर क्या मेरा लड़की होना , इसलिए नकार रही हो
सच कहती हूँ माँ , आने दो मुझे जीवन में एक बार
न मांगूंगी खेल-खिलौने , न मांगूंगी तुमसे प्यार

My Photo जय कृष्ण राय तुषार जी का एक गीत ---एक पत्ता हरा  जाने किस तरह है पेड़ पर


चोंच में
दाना नहीं है
पाँख चिड़िया नोचती है |
भागते
खरगोश सी पीढ़ी
कहाँ कुछ सोचती है |

आज के लिए बस इतना ही ..... फिर मिलते हैं अगले बृहस्पति वार को  ..... एक नयी हलचल के साथ ... अब इजाज़त दीजिये .... नमस्कार ---संगीता स्वरूप


23 comments:

  1. *शुभ-प्रभात दी .... !
    *अच्छे-अच्छे लिंक्स कि उम्दा प्रस्तुति .... :D

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  2. बहुत ही रोचक नये पुराने सूत्र..

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  3. अनगिनत रंगों की छटा अच्छी लगी !

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  4. सुन्दर लिंक्स
    आभार

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  5. बहुत सुन्दर एक से बढ़कर एक लिंक लाई हैं संगीता जी मेरी खरी- खरी को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार

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  6. बढ़िया लिंक थे। मंजु मिश्रा जी का लिंक नहीं खुल रहा

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    1. दीपिका जी नमस्कार !

      इस लिंक पर क्लिक कर के देखिये... http://manukavya.wordpress.com/

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    2. दीपिका जी ,

      शुक्रिया , मंजु जी का लिंक यहाँ तो खुल रहा है .... एक बार फिर कोशिश कीजिएगा ... आभार

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  7. bahut hi achchhe link ! meri rachna ko shamil karne ke liye bahut bahut shukriya sangeeta ji !

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  8. संगीता जी .. .. रचनाओं का चुनाव बहुत सुंदर है... सभी लिंक्स एक से बढ़ कर एक हैं... कुछ पढ़ लिए हैं, कुछ पढ़ने बाकी हैं...आपने लिंक्स की झलक इतने रोचक ढंग से प्रस्तुत की है कि पढ़े बिना रहा नहीं जा सकता... चर्चा में मुझे भी शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद...
    सादर
    मंजु

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  9. बहुत सुंदर लिंक्स, मेरे पसंदीदा रचनाकार है बहुत सारे
    आपका प्रस्तुत करने का अंदाज पसंद आया आभार !

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  10. संगीता जी ,.....सभी लिंक अच्छे लगे,...बधाई

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  11. बहुत ही रोचक लिंक्स...

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  12. दीदी
    प्रणाम,
    देर से आई आज.....
    दो को छोड़कर सारे नये लिंक्स मेरे लिये ढूँढा आपने
    धन्यवाद....
    सादर
    यशोदा

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  13. सुंदर लिक्स, बेहतर प्रस्तुति
    शानदार हलचल

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  14. अच्छे-अच्छे लिंक्स कि उम्दा प्रस्तुति .

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  15. बहुत बढ़िया लिंक्स........................
    शुक्रिया संगीता दी.

    सादर.

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  16. बहुत अच्छी हलचल है आंटी!
    सभी को पढ़ने की कोशिश है।

    सादर

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  17. कई अन पढ़े लिंक्स मिले.जाते हैं पढ़ने .आभार.

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  18. सार्थक हलचल संगीता जी ....
    शुभकामनायें ....

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  19. आज का फॉरमेट अर चयन देख मन बहुत खुश हुआ। अपनी रचना को देख कर तो और भी।

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ब्लॉग्स्पॉट मे चल रही कुछ तकनीकी गड़बड़ी से कुछ कमेंट्स स्पैम मे जा रहे हैं जिन्हें तत्काल प्रकाशित करने का प्रयास रहता है फिर भी यदि आपका कमेन्ट यहाँ तत्काल न दिखाई दे तो निश्चिंत रहें आपका कमेन्ट प्रकाशित ज़रूर होगा।

आशा है सहयोग बनाए रखेंगे।