प्रवीण पाण्डेय जी मन की इच्छाओं का वर्णन कर रहे हैं ----हैं अशेष इच्छाएं मन में
जब भी पीड़ाओं से भागा, राहों में कुछ और खड़ीं,
छोटी को झाँसा दे निकला, भाग्य लिखी थी और बड़ी,
आगत का भय, विगत वेदना, व्यर्थ अवधि क्यों खीचें हम,
दृश्य बदे जो, सब दिखने हैं, आँख रहे क्यों मींचे हम,
जैसा भी है, अपना ही है, उस अनुभव से क्यों च्युत हों,
जब आयेगीं, सह डालेंगे, दुगने मन से प्रस्तुत हों,
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समीर लाल जी का कहना है ---प्रभु से बड़ा प्रभु का नाम .... चुनाव संग्राम प्रभु से बडा प्रभु का नाम: चुनाव संग्राम- दोहे-कुण्डलियों के साथ "प्रभु से बडा प्रभु का नाम जपते रहो परिवार का नाम कृपा अगर तुम पर हो जाये पाओगे एक टिकट ईनाम." |
एम॰ वर्मा जी का कहना है कि - इस नगर में और कोई परेशान नहीं है खाना नहीं, बिजली और पानी नहीं है इस नगर में और कोई परेशानी नहीं है चूहों ने कुतर डाले हैं कान आदमी के
शायद इस शहर में चूहेदानी नहीं है
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मनोज कुमार जी की एक लघु कथा पढ़िये ---हर हाल में उस दिन दफ़्तर में पेपर कटिंग की एक छाया प्रति ख़ूब वितरित हो रही थी। किन्हीं विश्वस्त सूत्रों का हवाला देकर यह बताया गया था कि सरकार सेवानिवृत्ति की सीमा 60 वर्ष की जगह 62 वर्ष करने पर विचार कर रही है। |
अनुराग शर्मा जी लगता है नज़दीकियों से घबराते हैं और कुछ इस तरह अपने ख़यालों को बयां करते हैं ---इतना भी पास मत आओ मार तेरे प्यार की हमने प्रिये हँसकर सही है। शब्द मिटते जा रहे पर अर्थ तो फिर भी वही है॥ सर झुका लेते हैं जब भी देखते हैं हम तुम्हें।
रास्ते में छेड़ना तुम ही कहो कितना सही है॥
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वाणी शर्मा जी कल्पना में सोच रही हैं कि राधा और श्याम ने चन्दा से यही तो कहा होगा ---तू बतला दे मेरे चंदा लाता है सन्देश पिया का , उस तक भी पहुंचाता होगा तू बतला दे मेरे चंदा , पी तुझसे तो बतियाता होगा ... |
सतीश सक्सेना जी के गीत मन मोह लेते हैं .... बचपन की ख़्वाहिशों को नाम दिया है ---मृगतृष्णा |
मंजु मिश्रा अपनी क्षणिकाओं में गहन भाव भर, कह रही हैं कि ---अंधेरे छंटे ही नहीं-- जलते रहे मोमबत्ती से उम्र भर लेकिन अँधेरे थे कि छंटे ही नहीं…. |
हरीश भट्ट जी की एक संवेदनशील कहानी ----अंतस तक प्यासी है धरती "अनिरुद्ध ""....बहुत दिन से तुमने कुछ नया नहीं लिखा...... पूछा था कादम्बनी ने...एक सकून भरी मुस्कराहट के साथ कहा था अनिरुद्ध ने...नहीं कादम्बनी कुछ नया लिखने का मन नहीं ...मेरे अन्दर से तब कुछ उत्सर्जित होता हैं ..जब में अकेला होता हूँ ...दर्द और बेचैनी निकल ही आती हैं वर्कों पर ...लेकिन ...तुमसे मिलने के बाद सब कुछ पा लिया लगता हैं मेरी तलाश ख़त्म हुई... |
कौन चला होगा यहाँ पहली बार, जो भी चला होगा क्यों चला होगा, किसी से मिलने चला होगा या किसी से बिछड़कर ? |
सुनील कुमार जी लाये हैं संवेदनहीनता का नज़ारा ---आखिर ऐसा क्यों हुआ ? उसका नाम था अनुपमा , देखने में आकर्षक व्यक्तिव और उम्र लगभग चालीस साल परिवार के नाम पर दो बच्चे और पति ।वह एक निजी कंपनी में स्टेनो के पद पर कार्य करती थी ।उसके पति एक कंपनी में इंजिनियर थे ।अच्छा वेतन, कोठी, कार, |
मुक्ता दत्त कर रही हैं --एक गैर ज़रूरी बात न जाने क्या कुछ कहता रहता है ये आईना चुप क्यों नहीं रहता है??? |
मानव मेहता दर्द के दर्द को बयां कर रहे हैं --दर्द अब पत्थर हो चला है वक्त को हथेली पर रख कर ऊँगलियों पर लम्हें गिने हैं... दर्द देता है हौले से दस्तक- इन लम्हों के कई पोरों में बसा हुआ है वो.... |
सुमन जी एक कहानी के माध्यम से ज़िंदगी को समझने की बात कर रही हैं .... ज़रा पढ़िये ये चुटीली कहानी ---कवि और कौवा जिस कवि की मै बात करने जा रहीं हूँ, यह कवि पुराने ज़माने का लगता है ! नहीं तो हमारी तरह आज एक बढ़िया ब्लॉगर होता ! अपनी रचनाओं को ब्लॉग पर रोज छापता और खुश होता ! कमसे कम इस तरह frustrate तो नहीं होता ! खैर कहानी ही पढ़ लीजिये ! आप खुद समझ जायेंगे ! |
राजेश कुमारी जी खरी खरी बात कर रही हैं अपनी ---कुछ खरी खरी त्रिवेणियों में मेरे अपने ही फूलों ने झुका दिया इस डाली को वर्ना मेरी गर्दन ने कभी झुकना नहीं सीखा | |
मृदुला हर्षवर्धन परेशान हैं और अपने जज़्बात कुछ यूं बयां कर रही हैं ---तेरा इश्क़ ....आफत है तेरा इश्क है या आफत है उफ़....ज़माने भर से अदावत है तेरी आँखों से जो पी वो खालिस थी मयखाना-ए-ज़माने में तो बस मिलावट है |
मुकेश पाण्डे ज्वलंत समस्या पर अपनी लेखनी चला रहे हैं ----अजन्मी की पुकार सुना है माँ तुम मुझे , जीने के पहले ही मार रही हो कसूर क्या मेरा लड़की होना , इसलिए नकार रही हो सच कहती हूँ माँ , आने दो मुझे जीवन में एक बार न मांगूंगी खेल-खिलौने , न मांगूंगी तुमसे प्यार |
जय कृष्ण राय तुषार जी का एक गीत ---एक पत्ता हरा जाने किस तरह है पेड़ पर चोंच में दाना नहीं है पाँख चिड़िया नोचती है | भागते खरगोश सी पीढ़ी कहाँ कुछ सोचती है | |
आज के लिए बस इतना ही ..... फिर मिलते हैं अगले बृहस्पति वार को ..... एक नयी हलचल के साथ ... अब इजाज़त दीजिये .... नमस्कार ---संगीता स्वरूप

समीर लाल जी का कहना है ---
एम॰ वर्मा जी का कहना है कि -
मनोज कुमार जी की एक लघु कथा पढ़िये --
अनुराग शर्मा जी लगता है नज़दीकियों से घबराते हैं और कुछ इस तरह अपने ख़यालों को बयां करते हैं ---
वाणी शर्मा जी कल्पना में सोच रही हैं कि राधा और श्याम ने चन्दा से यही तो कहा होगा ---
सतीश सक्सेना जी के गीत मन मोह लेते हैं .... बचपन की ख़्वाहिशों को नाम दिया है ---
मंजु मिश्रा अपनी क्षणिकाओं में गहन भाव भर, कह रही हैं कि ---
हरीश भट्ट जी की एक संवेदनशील कहानी ----
सुनील कुमार जी लाये हैं संवेदनहीनता का नज़ारा ---
मुक्ता दत्त कर रही हैं --
मानव मेहता दर्द के दर्द को बयां कर रहे हैं --
सुमन जी एक कहानी के माध्यम से ज़िंदगी को समझने की बात कर रही हैं .... ज़रा पढ़िये ये चुटीली कहानी ---
राजेश कुमारी जी खरी खरी बात कर रही हैं अपनी ---
मृदुला हर्षवर्धन परेशान हैं और अपने जज़्बात कुछ यूं बयां कर रही हैं ---
मुकेश पाण्डे ज्वलंत समस्या पर अपनी लेखनी चला रहे हैं ----
जय कृष्ण राय तुषार जी का एक गीत ---
*शुभ-प्रभात दी .... !
ReplyDelete*अच्छे-अच्छे लिंक्स कि उम्दा प्रस्तुति .... :D
बहुत ही रोचक नये पुराने सूत्र..
ReplyDeleteअनगिनत रंगों की छटा अच्छी लगी !
ReplyDeleteरोचक लिंक्स! आपका आभार!
ReplyDeleteसुन्दर लिंक्स
ReplyDeleteआभार
Sunder Links....
ReplyDeleteबहुत सुन्दर एक से बढ़कर एक लिंक लाई हैं संगीता जी मेरी खरी- खरी को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार
ReplyDeleteबढ़िया लिंक थे। मंजु मिश्रा जी का लिंक नहीं खुल रहा
ReplyDeleteदीपिका जी नमस्कार !
Deleteइस लिंक पर क्लिक कर के देखिये... http://manukavya.wordpress.com/
दीपिका जी ,
Deleteशुक्रिया , मंजु जी का लिंक यहाँ तो खुल रहा है .... एक बार फिर कोशिश कीजिएगा ... आभार
bahut hi achchhe link ! meri rachna ko shamil karne ke liye bahut bahut shukriya sangeeta ji !
ReplyDeleteसंगीता जी .. .. रचनाओं का चुनाव बहुत सुंदर है... सभी लिंक्स एक से बढ़ कर एक हैं... कुछ पढ़ लिए हैं, कुछ पढ़ने बाकी हैं...आपने लिंक्स की झलक इतने रोचक ढंग से प्रस्तुत की है कि पढ़े बिना रहा नहीं जा सकता... चर्चा में मुझे भी शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद...
ReplyDeleteसादर
मंजु
बहुत सुंदर लिंक्स, मेरे पसंदीदा रचनाकार है बहुत सारे
ReplyDeleteआपका प्रस्तुत करने का अंदाज पसंद आया आभार !
संगीता जी ,.....सभी लिंक अच्छे लगे,...बधाई
ReplyDeleteबहुत ही रोचक लिंक्स...
ReplyDeleteदीदी
ReplyDeleteप्रणाम,
देर से आई आज.....
दो को छोड़कर सारे नये लिंक्स मेरे लिये ढूँढा आपने
धन्यवाद....
सादर
यशोदा
सुंदर लिक्स, बेहतर प्रस्तुति
ReplyDeleteशानदार हलचल
अच्छे-अच्छे लिंक्स कि उम्दा प्रस्तुति .
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिंक्स........................
ReplyDeleteशुक्रिया संगीता दी.
सादर.
बहुत अच्छी हलचल है आंटी!
ReplyDeleteसभी को पढ़ने की कोशिश है।
सादर
कई अन पढ़े लिंक्स मिले.जाते हैं पढ़ने .आभार.
ReplyDeleteसार्थक हलचल संगीता जी ....
ReplyDeleteशुभकामनायें ....
आज का फॉरमेट अर चयन देख मन बहुत खुश हुआ। अपनी रचना को देख कर तो और भी।
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