बुधवार की इस हलचल में हैं कुछ ख़ास लिंक्स ... भूल ही जाएंगे एक दिन टिमटिमाते तारों के बीच खिलखिलाकर हंसते चांद को ... कविता के भीतर कुछ शब्द लगातार कांपते रहते हैं...दिखा तो देती है बेहतर हयात के सपने ख़राब हो के भी ये ज़िन्दगी ख़राब नहीं ..बिल्कुल सच कहा है फिराक साहब ने जिन्दगी से शिक़वा शिकायत तो चलता ही रहता है ... पर हम आज ...
सबसे पहले चलेंगे दो ऐसे ब्लॉग पर जो हैं आज शिखर पर पर इनकी शुरूआत में कहीं है आज भी इनकी नज़र तो सबसे पहले ...
- 5 सितम्बर 2007 नीरज गोस्वामी जी .. जिनके पहलू में धरी तलवार हो ... फूल उनके हाथ में जंचते नहीं
- 02 जून 2010 यशवंत माथुर पर 'मैं ' करूँगा वो .... जो मेरा मन कहे
- आज फिर घर का सपना अंगड़ाई लेने लगा ... सपना अपने घर का
- किन बातों पर किसी अन्य देश की सुन्दरता को परखेंगे? ... बच्चे
- भूल ही जाएंगे एक दिन टिमटिमाते तारों के बीच खिलखिलाकर हंसते चांद को ... कविताएँ
- दिखा तो देती है बेहतर हयात के सपने ख़राब हो के भी ये ज़िन्दगी ख़राब नहीं ... फिराक साहब
- कविता के भीतर कुछ शब्द लगातार कांपते रहते हैं... शब्द-बोध, दिशा-बोध
- क्या है इनके पास भूख के सिवा ... चौराहे पर लुहार
- चाहे जैसे भी हो हरिश्चन्द्र का पतन करना ही होगा ... राजा हरिश्चन्द्र-1
- जाने कौन सी वो पीड़ा है जो दर्द बनकर लफ्जो में उतर आती है ... फिर कैसे पीड़ा को मूर्त रूप दे पाऊं
- जल रही हूं सदियों से है यही मेरा काम ... बाती
- नश्वर है शरीर पवित्र मन आत्मा तो है अमर मृत्यु शांत निश्छल .. यह जीवन
- वो नहीं मिलता मुझे ... मुझे इसका गिला अपनी जगह
- देह के घाव ... नहीं दिखते जिन अपनों को वे ह्रदय के ज़ख्म कहाँ देख पायेंगें ?
चलते-चलते एक नज़र यहां भी ... त्रिशंकु की दुविधा भी अजब है ....
इसी के साथ आप सबसे इज़ाजत लेती हूं .. शुभ दिन के साथ शुभकामनाएं ...

सुंदर हलचल सदा जी ...शामिल किया धन्यवाद
ReplyDeleteसुप्रभात सदा जी .... !
ReplyDeleteआपकी सुंदर हलचल खूब मची है .... !!
बढ़िया ।
ReplyDeleteसदा जी शुभप्रभात ...
ReplyDeleteहमेशा की तरह ...उत्कृष्ट लिंक्स से सजी ....सुंदर हलचल ....
शुभकामनायें .....
बस प्रभु कृपा हो ...मेरा कमेन्ट स्पैम में न जाये .....
सुंदर हलचल सदा जी.....................
ReplyDeleteशुक्रिया आपका.
सार्थक लिंक्स से सुसज्जित अच्छी हलचल
ReplyDeleteसार्थक साहित्यिक हलचल।
ReplyDeleteachchhi charcha
ReplyDeletemere sapno ke ghar ko aaj ki halchal mein jagah dene ke liye
abhaar
naaz
बेहतरीन लिंक्स के साथ बेहतरीन चर्चा सदा(हमेशा) की तरह...:)
ReplyDeleteबढ़िया लिंक्स सुन्दर हलचल.
ReplyDeleteआदरणीया सदा जी
ReplyDeleteजो मेरा मन कहे की सब से पहली पोस्ट को शामिल करने के लिये तहे दिल से शुक्रिया।
बहुत ही अच्छी हलचल बनाई है आपने।
सादर
्बहुत सुन्दर हलचल सदा जी
ReplyDeletesada ji hardik abhar shamil karne ke liye ....sundr prastuti aapki
ReplyDeleteइस हलचल में ज़िन्दगी है।
ReplyDeleteबहुत बढ़िया रोचक लिंकों की प्रस्तुति,
ReplyDeleteMY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...
बहुत बढ़िया रोचक लिंकों की प्रस्तुति प्रस्तुति,.
ReplyDeleteMY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...