Monday, April 16, 2012

हैलो जी अंतर्यामी जी !!

नमस्कार! सोमवार की इस हलचल मे आपका स्वागत है इन खास लिंक्स के साथ--

(1)

 

हैलो जी अंतर्यामी जी !!

आप से कुछ बात करनी थी
क्योंकि मैं थोड़ा

(2)

एक आलौकिक अनुभूति

होती है
जब साथ होते हैं

मैं और मेरा कंप्यूटर


(3)

मुझे नौकरी चाहिए..

और साथ मे चाहिये

(4)

रे मन ... पथिक ...रसिक ....अलबेला ....!!

कि हो चुका

अंत उफ़ आसान थोड़ा-


(5)

और

ये कैसी रिश्तों की विदाई

जो अब तक समझ न आई 

(6)

 

जब तुम दूर होते हो

तब एहसास होता है
कि हूँ

मैं तेरी प्रतिबिम्ब



और चलते चलते यह गाना सुनते हुए इजाजत दीजिये यशवंत माथुर को --





17 comments:

  1. "हैलो जी अंतर्यामी जी"मैं थोड़ी सी घबड़ा गई हूँ"एक आलौकिक अनुभूति"..... !!

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  2. मन में हलचल पैदा कर रही आज की हलचल नई पुरानी , अन्तर्यामी ने मन की सारी उलझन सुलझाने की ठानी |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  3. प्रस्तुतीकरण सूत्रों की रोचकता और उभार देता है।

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  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति यशवंत....

    जब तुम दूर होते हो
    तब एहसास होता है
    कि हूँ
    मैं तेरी प्रतिबिम्ब

    बहुत खूब....

    सस्नेह.

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  5. सुंदर क्षणिकाओं से सजी ....सुंदर हलचल ...लिंक्स भी बढ़िया ...
    आभार ...इस हलचल में मेरी रचना को स्थान दिया ...यशवंत जी ...उम्मीद है आज मेरा कमेन्ट स्पैम में नहीं जायेगा .. ....

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  6. क्षणिकाओं में सजी सुंदर हलचल ....

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  7. प्रस्तुतीकरण बहुत रोचक है........

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  8. सुन्दर हलचल के साथ गज़ब का गीत.

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  9. यशवंत जी और नयी -पुरानी हलचल के सभी सदस्यों को मेरा हार्दिक आभार........

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  10. बहुत सुंदर क्षणिकाओं के मध्य से सुन्दर लिंक्स के साथ सार्थक हलचल प्रस्तुति में मुझे शामिल करने के लिए आभार!

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  11. मुझे शामिल करने के लिए ,थैंक्स.प्रस्तुति का ढंग और गीत बहुत पसंद आया.

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  12. nice effort yash ji .
    and thanks for including me here .....

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  13. sunder prastuti sunder rachnaon ki 'links' ke saath va ek atyant ki khoobsurat geet ka saath.
    meri rachna ko sneh dene liye abhaar.

    shubhkamnaon sahit

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  14. Der me ane ke liye maphi meri rachana ko Ethan dene ke liye aabhar...

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