| रंगबिरंगी तितली जैसी |
मैने कह तो दिया की मै चर्चा करूँगी। लेकिन कल मुझे यशवन्त माथुर कह सकते हैं, शानू जी आप रहने दीजिये। आपके बस की बात नही, क्योंकि आप तो बस अपने ब्लॉग परिवार को उठा लाई हैं। एक बार भी नही सोचा कि कुछ पुराने लोग भी अनवरत लिखे जा रहे हैं। कुछ भी कभी भी और क्वचिदन्यतोयपि उनके क्रांति स्वर को कोई तो है जो शब्दों के पंख देगा।
अगर अनुपमा जी ने भी मुझसे पूछ लिया कि आपने ऎसा क्यों किया एक हिंदुस्तानी की डायरी में जाने क्या-क्या लिख डाला। क्या उस समय भी मेरी कलम से प्रेम रस की कोई धारा बह पायेगी? क्या अंतर्मथन में कुछ कुलबुलाहट सी आरम्भ नही हो जायेंगी? कैसे अभिव्यक्त कर पाऊँगी उस समय दिल की बातें? कैसे समझा पाऊँगी मेरे विचार किउसने कहा था।
ये सब बना न दे बात का बतंगड़ इस लिये पल-पल हर पल चर्चा करनी ही होगी और वो भी कुछ विशेष तरह से कि कुश की कलम भी न लिख पाये वो लिख डालूं कुछ मेरी कलम से मै।
बिना किसी लाग लपेट के मै एक ही बात कहना चाहती हूँ कि बहुत दिनों से मन आवारा-बंजारा सा घूम रहा था कि अचानक किसी ने दिल के दर्पण पर लिख दिया प्रेम ही सत्य है। मै सुनते ही एक बार आवेश में आ गई, अभी सोच ही रही थी कि शायद यह सब किस्सा-कहानी की बातें हैं। लेकिन तभी मेरे अंतर्मन में किसी ने आवाज दी। यह आधा सच है मोहतरमा। यह प्रेम-व्रेम कुछ नही अच्छे खासे दिमाग का कबाड़खाना बना के रख देता है सदा। मिले तो ठीक नही तो दर्द में भी डाल लो आदत मुस्कुराने की वरना...।
ये सब बना न दे बात का बतंगड़ इस लिये पल-पल हर पल चर्चा करनी ही होगी और वो भी कुछ विशेष तरह से कि कुश की कलम भी न लिख पाये वो लिख डालूं कुछ मेरी कलम से मै।
बिना किसी लाग लपेट के मै एक ही बात कहना चाहती हूँ कि बहुत दिनों से मन आवारा-बंजारा सा घूम रहा था कि अचानक किसी ने दिल के दर्पण पर लिख दिया प्रेम ही सत्य है। मै सुनते ही एक बार आवेश में आ गई, अभी सोच ही रही थी कि शायद यह सब किस्सा-कहानी की बातें हैं। लेकिन तभी मेरे अंतर्मन में किसी ने आवाज दी। यह आधा सच है मोहतरमा। यह प्रेम-व्रेम कुछ नही अच्छे खासे दिमाग का कबाड़खाना बना के रख देता है सदा। मिले तो ठीक नही तो दर्द में भी डाल लो आदत मुस्कुराने की वरना...।
अब ये भी कोई बात हुई भला कोई भी फ़ुर्सत के पलों में आकर दस्तक देने लग जाये...:( चलो छोड़ो बहुत सुन लिया मन पाये विश्राम जहाँ ऎ दिल ले चल मुझको आज वहाँ।
अरे रे रे...मुझे तो चिट्ठों की चर्चा करनी है। ऎसा करती हूँ पहले-पहल उनका जिक्र करती हूँ जो मेरे नाते रिश्तेदार हैं। पता चला कल से मेरी चर्चा देख सब कहें शानू तो बदल गई। तो भैय्या सबसे पहले मै अपने भाई लोगों का जिक्र कर लूँ नही तो नाराज हो जायेंगे। एक भाई ऎसे हैं जिनके गीत वादियों में गूँजते रहते हैं। जो दूर होकर भी मेरे पास रहते हैं। और एक मोटा भाई कहने को ही मोटे नही हैं समझ लीजिये मै नाराज हूँ, उनसे मालूम भी है क्या करते हैं वो...मुझ जैसी सून्दर नारी को अपने पोते से कहकर दादी कहलवाते हैं...उह्ह ये भी कोई बात है।
एक भाई हहहहह हँसिये मत उन्हें आ गई तो मूँछॆ भी हँसने लग जायेंगी। अरे भाई जो पेड़े लाये थे वो तो थप गये...:)
भाई तो बहुत है एक बहुत मासूम है देखते ही लग जायेगा अपुन का ही भाईच है खुदा महफ़ूज़ रखे हर बला से।
भाई की बात चली तो वो कहते हैं मै चाहूँगा भी तो आप मानेंगी नही मतलब भाई को भाई नही कहूँ तो भला क्या कहूँ।डीलडोल से भी भाई से लगते हैं भाई...:(।
स्कूल में यही शिक्षा पाई थी। सभी भारतीय मेरे भाई-बहन हैं ये और बात है कि हम चुपके से यह भी कह देते थे” एक को छोड़कर” तो वही निभा रही हूँ मै भी क्या गलत कहिये? एक राज की बात बताना तो भूल ही गई सभी ब्लॉगर मेरे भाई बहन हैं तो है और मज़ेदार बात... मेरे पति को ब्लॉग बनाना आता ही नही।
आपको बताऊँगी नही मुझसे दस साल बड़ी है मै बताऊँगी तो पीटेंगी बचपन में बहुत प्यार करती थी आजकल अचार बना रही हैं।ब्लॉग पर...:) अचार का स्वाद चखना हो तो चखना बहुत दिन से अचार बना रही हैं वो।
मुझे पता है बहुत से ब्लॉग छूट गये हैं कारण सभी ने अपने घर की पहचान दी ही नही।... अरे वो भी नही मानती कितनी बार कहा मेरी माँ में आपका चेहरा मिलता है मगर नही वो तो सुनती ही नही।
चलती हूँ आज का राशीफ़ल देख कर बताना की वो मुझे चर्चा करने देंगे या बस...हो गई..।
चलती हूँ आज का राशीफ़ल देख कर बताना की वो मुझे चर्चा करने देंगे या बस...हो गई..।
जाने से पहले कुछ न गुनगुनाऊँ कुछ न सुनाऊँ तो लगेगा समोसे के साथ चटनी नही मिली तो लीजिये
यह भी आपको बहुत पसंद आयेंगे...
इक श्वाँस महक उठी होगी.
सुंदर प्रयास है।
ReplyDeletenaval..sunder prayas...
ReplyDeletemujhe shamil karne ke liye abhar ....!!
bahut mehnat se taiyar ki aaj ki halchal....!!
badhai evam shubhkamnayen .
मस्त चर्चा की है, मजा आ गया।
ReplyDeleteचर्चा में मूंछों को स्थान देने के लिए आभार।
पेड़े खप गए तो क्या हुआ और आ जाएगें।
Are, naraz ho? Bachcha didi ko dadi likh gaya...dantenge use. :)
ReplyDeleteआलेख के शब्दों में ब्लॉग लिंकों को बुनते हुए आपने सुन्दर चर्चा की है। इसमें कई पुराने ऐसे ब्लॉगरों के ब्लॉग हैं जिनमें निरंतर पठनीय आलेख प्रकाशित हो रहे हैं पर नये ब्लॉगरों को उनका पता ही नहीं मालूम. आप निरंतर इन ब्लॉगों को भी पढ़ती है यह जानकर खुशी हुई, इस चर्चा से इन ब्लॉगों को नये पाठक भी मिलेंगें.
ReplyDeleteसुन्दर और एक अलग तरह की ब्लॉग चर्चा के लिए धन्यवाद.
सुन्दर और एक अलग तरह की ब्लॉग चर्चा
ReplyDeleteआभार
ले जाता है गर्त में, मानव को अभिमान।
ReplyDeleteजो घमण्ड में चूर हैं, उनको गुणी न जान
बिलकुल ठीक आंकलन किया है। चर्चा करने का ढंग भी बहौत ठीक है ।
धन्यवाद ।
क्या बात है बेहतरीन
ReplyDeletebahut sunder links ke saath sunder dhang se prastut bemisaal rahi hulchal.meri post "sawan aayo ri"shamil karane ke liye thanks.aasha hai aisaa hi prem aapka meri rachanaon per banaa rahegaa.badhaai aapko.
ReplyDeleteआदरणीय सुनीता जी
ReplyDeleteसब से पहले तो यहाँ हम सबकी ओर से आपका बहुत बहुत स्वागत है।
"मैने कह तो दिया की मै चर्चा करूँगी। लेकिन कल मुझे यशवन्त माथुर कह सकते हैं, शानू जी आप रहने दीजिये। आपके बस की बात नही, क्योंकि आप तो बस अपने ब्लॉग परिवार को उठा लाई हैं।
हा हा हा ..ऐसा कहने का कभी कोई प्रश्न ही नहीं उठता बल्कि आपका ये अंदाज़ बहुत पसंद आया या सच कहूँ तो बहुत ज्यादा पसंद आया.आप अपने अनुसार पूरी तरह स्वतंत्र हैं और मेरा मानना है कि प्रस्तुतिकरण की मौलिकता यहाँ भी बनी रहनी चाहिए.
सभी लिंक्स पर जाने का प्रयास है।
सादर
मुझे अपना ब्लॉग ढूँढने में खासी परेशानी हुई भई, पलटकर मेल करने वाला था कि क्यों बेवकूफ बना रहीं हैं बहनजी। मगर तीसरे प्रयास में मिल गया.........। शुक्रिया, बहुत ही दिलचस्प अन्दाज़ चिट्ठा चर्चा का, अभी तक की चिट्ठा चर्चाओं में सबसे निराला और अनोखा। जुग—जुग जीयों बहनजी....।
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया अन्दाज़ लगा ये तो चर्चा का ...बधाई
ReplyDeleteसुनीता जी ,
ReplyDeleteगज़ब की चर्चा है ... ऐसी चर्चा जिसे बहुत मन से पढ़ना पड़े ..वरना नाम ढूँढते रह जाओगे :):)
अजी मैंने तो मेल कर भी दिया था ..और फिर से पढने के प्रयास में पकड़ में आया ...
शब्दों की बुनावट बहुत खास है .. काफी नए ब्लोग्स से परिचय हुआ ..अच्छे चयन और बढ़िया चर्चा के लिए बधाई ... मौलिक अंदाज़ चर्चा का ..
mast ||
ReplyDeletebhaut hi sunder sankalan... dhanywaad....
ReplyDeleteहा हा हा अगर सबके ब्लॉग का लिंक ढूँढना आसान होगा तो दूसरे का ब्लॉग शायद सभी न खोल पायें। अब खुद का ब्लॉग ढूँढने के चक्कर में सारे ब्लॉग पढ़े जायेंगे।
ReplyDeleteअसुविधा के लिये माफ़ी चाहती हूँ।
सादर
वाह ... बहुत खूब ... चर्चा का आपका यह अंदाज़ पसंद आया ... जारी रहिएगा ... शुभकामनाएं !
ReplyDeleteमनपसन्द अन्दाज़ देख कर आनन्द आ गया..माफ़ी क्यों...अच्छा है न इसी बहाने सभी ब्लॉग़ पढ़े जाएँगे...वैसे अपना ब्लॉग़ दिखे तो उसे क्या पढ़ना बाकि खोल रहे हैं लेकिन धीरे धीरे....:)
ReplyDeleteबेहतरीन चर्चा ....
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर अन्दाज़ लगा चर्चा का ...बधाई...
ReplyDeleteसुंदर अंदाज में अच्छी चर्चा ,आभार
ReplyDeletebehad nayepan ke saath.....maza aa gaya.
ReplyDeleteshanu ji naam ki shakhsiyat se ek bar milna hua tha aur ab tak kayi bar apka lekhan bhi padha lekin gambhir lekhan aur apki dimag me jo chhavi thi vo aaj tak match nahi ho paye the....lekinnnnnnnnnn.....aaj ki ye charcha padh kar match ho gaye :) bhayi mast ek dam mast likha hai...bilkul mere jaisa...aapne kabhi pahle charcha manch dekha ho (june'10 to sept'10) tak ka to meri ki hui charchaye apko mil jayengi mera bhi yahi style raha hai. ek aur raj ki bat ki mera real name bhi sunita hai.
ReplyDeletekhair kul mila kar aapka andaaz itna badhiya laga ki sabhi links dekhne se pahle apko yaha ye sab likhna jyada jaruri laga.
ek baat aur aapne jo information dene ke koshish ki vo thodi gadbad thi...aisa laga jaise galti se aap meri tippani khidki me mere hi blog ka pata maatr de gayi. ho sakta hai ye bhi aap ka ek andaaz ho.
lekin kul milakar apki charcha ka andaz mast hai. aabhar.
इस अनोखी चर्चा में तो आनंद आ गया आज ...
ReplyDeleteoye hoye ...gazab kar dia ji.kya kamaal ka samaa badha hai.
ReplyDeletehalchal hono band hi nahi ho rahi :).
bahut bahut shukriya sunita ji.
लाज़वाब चर्चा का अंदाज़..कहानी की तरह बार बार पढने का मन करता है..
ReplyDeleteआभार!
ReplyDeleteसुनीता
ReplyDeleteसबसे पहले आज की महफिल में मुझे सम्मिलित करने के लिये आभार ! कई अच्छी पोस्ट पढ़ने को मिलीं. सुंदर चर्चा के लिये बधाई !
bahut hi badiya.. ek naya dhang dekhne ko mil gaya.. :)
ReplyDeleteमेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)
चर्चा का यह अंदाज़ भी खूब रहा . बढ़िया जी .
ReplyDeleteपसंद आया यह नया अंदाज....
ReplyDeleteवाह भई , जे बात । चैंपियन हर मैच को अपने इश्टाईल में ही खेलता है फ़िर चाहे वो टेस्ट मैच हो चाहे ट्वेंटी-ट्वेंटी । एकदम बेमिसाल और कमाल धमाल । देखिए कि इंडिया में हम भी दो शानू के फ़ैन तो हईये हैं ..एक कुमार शानू और दूसरी सुनीता शानू ...बहुत बहुत शुभकामनाएं जी , मैदान में आने का । और हां पहिला था इसलिए आपको फ़ौरन ही ई आग्रह भी कर देते हैं कि अरे कोई जरूरी है क्या कि ई बताया जाए कि आपकी पोस्ट की चर्चा इहां है , उहां है , ........जो चर्चा होगी तो बात हम तलक भी पहुंच ही जाएगी , कुछ इस तरह से गुफ़्तगू हो तो कुछ और बात हो । आज ब्लॉगिंग पर ही एक आलेख में ये बातें भी कहने जा रहा हूं । आपको शुभकामनाएं
ReplyDeleteसुनीता जी ,बहुत मस्त अंदाज़ में चर्चा सजायी है :)..... बाकी लिन्क्स पर तो धीरे-धीरे जायेंगे अभी तो आपके द्वारा दिया गया परिचय का ही आनन्द और ले लें .... वैसे सच पूछें तो पहेली का मज़ा आ गया .... आभार !
ReplyDeleteपहली ही बाल बाउंड्री पार करवा दी……………वाह क्या अन्दाज़-ए-बयाँ है………बहुत ही सुन्दर तरीका अख्तियार किया है सभी के छक्के छुडवा दिये………तो आ गयी हैं मल्लिका-ए-चर्चा हलचल मचाने…………होशियार खबरदार्…॥………सच बहुत पसन्द आया आपका अन्दाज़ तो खुद को नही रोक पाई इस अन्दाज़ मे कमेंट करने से।
ReplyDeleteशानदार पोस्ट ,उम्मीद है कुछ यहा कुछ धमाकेदार होगा
ReplyDeleteWAH !!!!!
ReplyDeleteहलचल में शामिल होने के लिए आपको बधाई....
ReplyDeleteऔर ढेर सारी शुभकामनायें !!
आज की हलचल बहुत सुन्दर है..... इक पहेली जैसी लगती है.....खुद को ढूढने में इतनी कोशिश पहले शायद हम सभी ने कम ही की होगी ..... और वो भी बड़ी उत्सुकता के साथ ....!!!
mujhe shamil karane ke liye aabhaar. bilkul hi naye kalevar me,naye andaz me prastuti atayant hi sarahaniy hai.
ReplyDeleteसार्थक प्रयास....
ReplyDeletecharcha ka andaj bilkul naya aur galti se ham bhi charcha men
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया चर्चा ...बधाई
ReplyDeleteBahut sundar..
ReplyDeleteजी बहुत बहुत शुक्रिया, मेरे ब्लाग को यहां स्थान देने के लिए। ब्लागों की चर्चा के कई प्लेटफार्म यहां मैने देखें हैं, लेकिन जो अंदाज और ताजगी आपकी चर्चा का है, शायद मैने पहली बार देखा है। एक तो पूरा दिन लग गया, सभी को देखते देखते। रविवार का ज्यादा समय यहां मिले लिंक्स पर जाने में ही कट गया। एक बार फिर आपका शुक्रिया।
ReplyDeleteआप सभी ने अपना बहुमूल्य समय दिया आभारी हूँ। सभी का यही कहना था की लिंख ढूँढने के चक्कर में चर्चा पहेली बन गई। लेकिन यह भी सच है की आप सभी ने इस चर्चा का आनन्द लिया। यह मेरे लिये हर्ष की बात है। मै कोशिश करूँगी कि हमेशा आप सबके लिये ऎसा ही मजेदार कुछ लेकर आऊँ ताकी आप सभी चर्चा का भरपूर आनन्द उठा सकें। एक बार फ़िर आप सभी का धन्यवाद।
ReplyDeleteकृपया उपर लिखे कमैंट में (लिख) को लिंक पढ़ा जाये।
ReplyDeleteकुछ लोगों के कमैंट पर कुछ सवाल भी हैं
ReplyDeleteसुनील जी आपकी कविता आज भी पढ़ी बहुत अच्छी है गलती से आपको चर्चा में नही लिया है क्या अच्छा है क्या बुरा ये दिल की बातें दिल ही जानता है उसे ही समझने दीजिये। झमेले में न फ़ँसिये।
अजय जी आपने लिखा यहाँ वहाँ बताने की जरूरत नही की आपकी चर्चा की गई है। तो मै बता दूँ यह पहले से डीसाईड था की चर्चा के साथ हमे सभी को बताना होगा। अब यह मॉडरेटर साहब का हुकुम...:) आप आये और आपने चर्चा पसंद की बहुत अच्छा लगा। अपना स्नेह बनाये रखियेगा।
ReplyDeleteहाँ अनामिका जी मैने गलती से आपको आपके ही ब्लॉग का लिंक दे दिया था।
ReplyDeletebadhai sunita ji, shaandar charcha ke liye. roman lipi ka istemaal kar rahi hoon, kyonki mera baraha is vakt kharaab hai.
ReplyDeletecharcha men mera link shaamil karne ke liye shukriya bhi.
agaaaj bata raha hai, kaam me lagan hai:)
ReplyDeleteकवित्त चिट्ठा चर्चा
ReplyDeleteतुम्हारा प्यार समंदर है, डूबी जा रही हूँ मैं
ReplyDeleteरोक लो मुझको इससे पहले मैं फ़ना हो जाऊँ